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टाटा सिएरा: नया मॉडल जल्द ही बाजार में लॉन्च होने के लिए तैयार

टाटा मोटर्स अपनी क्लासिक SUV टाटा सिएरा को एक नए अवतार में लॉन्च करने जा रही है। 2025 में आने वाली यह कार अत्याधुनिक फीचर्स और पावरफुल इंजन के साथ बाजार में दस्तक देगी। टाटा सिएरा 2025 की प्रमुख विशेषताएं ✅ पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वेरिएंट्स – पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक मॉडल को प्राथमिकता। ✅ 500+ किमी रेंज वाली EV – टाटा के नवीनतम Gen-2 EV प्लेटफॉर्म पर आधारित। ✅ क्लासिक डिज़ाइन, मॉडर्न टच – पुरानी सिएरा की सिग्नेचर Alpine Windows को नए अंदाज में डिजाइन किया गया है। ✅ लक्ज़री इंटीरियर – तीन डिस्प्ले स्क्रीन और आरामदायक केबिन। ✅ 4x4 ड्राइव ऑप्शन – ऑफ-रोडिंग के शौकीनों के लिए बेहतरीन अनुभव। 2025 में होगी लॉन्चिंग नई टाटा सिएरा को Auto Expo 2023 में पेश किए गए कॉन्सेप्ट मॉडल के आधार पर विकसित किया गया है। टाटा की "New Forever" रणनीति के तहत आने वाली यह SUV बाजार में जबरदस्त सफलता हासिल कर सकती है। लॉन्च डेट, कीमत और फीचर्स से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें!

शुष्क गुजरात में शराब पर प्रतिबंध: हर 4 सेकंड में जब्त हो रही एक बोतल!

 शुष्क गुजरात में शराब पर प्रतिबंध: हर 4 सेकंड में जब्त हो रही एक बोतल!



गुजरात में शराब बंदी कैसे प्रभावित कर रही है?

शराब पर प्रतिबंध होने के बावजूद, गुजरात में हर साल लाखों लीटर अवैध शराब पकड़ी जा रही है। पुलिस और प्रशासन इस पर रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन अवैध तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है।

मुख्य आंकड़े:

82 लाख शराब की बोतलें जब्त की गईं।


जब्त शराब की कुल कीमत लगभग 144 करोड़ रुपये।


हर 4 सेकंड में एक शराब की बोतल पुलिस के हाथ लग रही है!

अहमदाबाद में अकेले 3.06 लाख शराब की बोतलें पकड़ी गईं।

वडोदरा, सूरत, भावनगर, नवसारी जैसे इलाकों में करोड़ों की शराब बरामद।


ट्रकों, गोदामों, वाटर टैंकों में छिपाकर शराब की तस्करी की जा रही थी।


अवैध शराब कारोबार क्यों फल-फूल रहा है?

गुजरात में शराब प्रतिबंधित होने के कारण ब्लैक मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।


पड़ोसी राज्यों से गुप्त रूप से तस्करी की जाती है।


नई-नई तरकीबों से शराब लाने की कोशिशें जारी हैं।



सरकार की कड़ी कार्रवाई


पुलिस की सख्त निगरानी बढ़ाई गई।


नए कानून और तेज़ कार्रवाई से सख्ती बढ़ाई जा रही है।


ड्रोन और CCTV कैमरों की मदद से ट्रैकिंग की जा रही है।

सामाजिक प्रभाव

शराबबंदी से अवैध कारोबार बढ़ रहा है।

लेकिन सरकार अभी भी इस प्रतिबंध को जारी रखना चाहती है।


निष्कर्ष

गुजरात में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार थम नहीं रहा। सरकार लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंध ही इस समस्या की जड़ है।

आपका क्या कहना है?

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