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चीनी कार ब्रांड्स का वैश्विक EV और प्लग-इन हाइब्रिड बाजार में दबदबा: 76% बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा
चीनी कार ब्रांड्स का वैश्विक EV और प्लग-इन हाइब्रिड बाजार में दबदबा: 76% बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा
दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और प्लग-इन हाइब्रिड बाजार तेजी से बढ़ रहा है, और इसी के साथ चीनी ऑटोमोबाइल कंपनियां इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व बढ़ा रही हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 तक EV और प्लग-इन हाइब्रिड मार्केट में 76% बाजार हिस्सेदारी चीनी ब्रांड्स के कब्जे में होगी।
चीन का EV बाजार इतना मजबूत क्यों है?
चीन आज दुनिया का सबसे बड़ा EV बाजार बन चुका है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं - स्थानीय निर्माताओं का विस्तार, सरकारी समर्थन, तकनीकी नवाचार और आक्रामक बिक्री रणनीतियां।
1. चीनी कंपनियों का दबदबा
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के क्षेत्र में चीनी कंपनियां अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
BYD (Build Your Dreams) – 2024 के अंत तक Tesla को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा EV बेचने वाली कंपनी बन गई।
Nio और XPeng – प्रीमियम इलेक्ट्रिक कार बाजार में Tesla और Mercedes-Benz को चुनौती दे रहे हैं।
Geely और MG Motors – यूरोप और भारत में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
2. चीनी सरकार का समर्थन
चीन की सरकार अपने EV उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां लागू कर रही है:
सब्सिडी और टैक्स छूट – EV खरीदने पर ग्राहकों को बड़ी टैक्स छूट मिल रही है।
EV चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास – 2025 तक 10 लाख से अधिक चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना है।
मैन्युफैक्चरिंग सपोर्ट – बैटरी निर्माण में आवश्यक धातु और अन्य सामग्रियों की लागत कम करने के लिए सरकार सहूलियत दे रही है।
3. सस्ती तकनीक और लागत प्रभावी उत्पादन
चीनी कंपनियां कम लागत में बेहतरीन बैटरी तकनीक विकसित कर रही हैं। उदाहरण के लिए:
BYD की Blade Battery टेक्नोलॉजी कारों की बैटरी लाइफ बढ़ा रही है।
Lithium Iron Phosphate (LFP) बैटरियां – सस्ती और टिकाऊ बैटरियों का निर्माण हो रहा है, जिससे कीमतें कम हो रही हैं।
वैश्विक EV बाजार में चीन की एंट्री
फिलहाल EV बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा चीन, यूरोप और अमेरिका में है, लेकिन:
चीनी कंपनियां यूरोप और मिडिल ईस्ट में अपना विस्तार कर रही हैं।
Tesla, Volkswagen, BMW जैसी कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है।
अनुमान है कि 2026 तक चीनी EV ब्रांड्स की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी 80% तक पहुंच सकती है।
भविष्य की संभावनाएं: चीनी EV कंपनियों का अगला कदम
1. चुनौतियां – अमेरिकी और यूरोपीय बाजार में प्रतिबंध
अमेरिका और यूरोप चीनी EV ब्रांड्स पर टैरिफ और प्रतिबंध लगा सकते हैं।
यह अमेरिका की कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा, लेकिन यूरोपीय बाजार में चीनी कंपनियों का दबदबा बना रहेगा।
2. चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार
BYD, Tesla और CATL कंपनियां Hyper Fast Charging तकनीक पर काम कर रही हैं।
यह टेक्नोलॉजी 2027 तक EV मार्केट में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
3. भारत और अन्य विकासशील बाजारों में विस्तार
चीनी कंपनियां भारत में EV बाजार में प्रवेश करना चाहती हैं, खासतौर पर MG Motors और BYD।
अगर भारतीय सरकार चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाती है, तो ये कंपनियां यूरोप और मिडिल ईस्ट की ओर ध्यान देंगी।
निष्कर्ष
EV बाजार में चीनी कंपनियां 76% हिस्सेदारी के साथ दुनिया की सबसे बड़ी खिलाड़ी बन गई हैं। सरकारी समर्थन, तकनीकी विकास और कम लागत वाली EVs के कारण इनका दबदबा बना हुआ है। हालांकि, अमेरिका और यूरोप में संभावित व्यापारिक प्रतिबंध इन कंपनियों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
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